आज के समय में घर का महीने का खर्च देखते हुए छोटी-छोटी बचत भी काफी मायने रखती है। राशन का खर्च हो, बिजली का बिल हो या फिर रसोई गैस का सिलेंडर, हर चीज का खर्च अगर थोड़ा भी कम किया जा सके तो महीने के आखिर में इसका सीधा असर घर के बजट पर दिखाई देता है। खासकर LPG की बात करें तो बहुत से घरों में गैस का इस्तेमाल रोज सुबह से लेकर रात तक होता है। चाय बनाना, नाश्ता तैयार करना, दाल और सब्जी पकाना, रोटी बनाना, दूध गर्म करना और कभी-कभी अलग से पानी गर्म करना, इन सभी कामों में गैस खर्च होती रहती है
अब जरा एक आम किचन की स्थिति सोचिए। सुबह गैस जलाई गई और चाय बनाते समय सब्जी काटने का काम भी चलता रहा। फिर सब्जी बनाने के लिए कड़ाही गैस पर रखी गई लेकिन मसाले अभी तक तैयार नहीं थे। तेल गर्म होता रहा और उसके बाद प्याज काटकर डाली गई। दोपहर में दाल खुले बर्तन में काफी देर तक पकती रही। शाम को दूध गर्म करने के लिए फिर गैस जलाई गई और रात में खाना बनाते समय कई बार बर्नर तेज और धीमा किया गया। इनमें से हर काम अपने आप में बहुत छोटा लगता है लेकिन पूरे महीने में ऐसे छोटे-छोटे समय और गैस के इस्तेमाल का अच्छा खासा फर्क पड़ सकता है
यही वजह है कि LPG बचाने के लिए हमेशा खाना कम बनाना या कम गैस इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। कई बार सिर्फ खाना पकाने का तरीका बदलने से ही गैस की खपत कम की जा सकती है। सही बर्तन का इस्तेमाल, सही बर्नर चुनना, खाना पकने के बाद आंच कम करना, प्रेशर कुकर का सही इस्तेमाल करना और गैस जलाने से पहले पूरी तैयारी कर लेना जैसी आदतें किचन में काफी काम आती हैं
लेकिन यहां एक बात पहले ही साफ कर देना जरूरी है। इंटरनेट पर कई जगह लिखा मिलता है कि किसी खास तरीके से गैस बचाने पर सिलेंडर सीधे 15 या 20 दिन ज्यादा चलेगा। ऐसा हर घर में तय नहीं होता। किसी घर में चार लोग हैं तो गैस की खपत अलग होगी और किसी घर में आठ लोग हैं तो अलग। कोई परिवार रोज तीन बार खाना बनाता है तो उसकी खपत अलग होगी और कोई एक बार ज्यादा खाना बनाकर दोबारा गर्म करता है तो उसका इस्तेमाल अलग होगा
इसलिए नीचे बताए गए तरीकों को किसी निश्चित बचत की गारंटी की तरह नहीं बल्कि ऐसी practical kitchen habits की तरह समझना चाहिए जिनसे बेकार की गैस खपत कम की जा सकती है
खाना पकाते समय बर्तन?
LPG बचाने का सबसे आसान तरीका है कि जब भी खाना पकाने की स्थिति हो वहां जरूरत के हिसाब से बर्तन पर ढक्कन लगाकर पकाएं। दाल, सब्जी, चावल, सूप या पानी जैसी चीजों को पकाते समय अगर बर्तन पूरी तरह खुला रहता है तो गर्मी और भाप लगातार बाहर निकलती रहती है। इसके कारण खाना पकाने में ज्यादा समय लग सकता है
जब बर्तन पर सही ढक्कन लगा होता है तो अंदर की गर्मी और भाप काफी हद तक अंदर बनी रहती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर खाना ढक्कन लगाने से किसी तय प्रतिशत तक जल्दी पक जाएगा लेकिन कई मामलों में इससे खाना जल्दी तैयार करने और गर्मी की बर्बादी कम करने में मदद मिलती है
जरा दाल को ही देखिए। अगर दाल खुले बर्तन में लगातार उबल रही है तो पानी तेजी से कम होता रहेगा और आपको बीच-बीच में पानी डालने की जरूरत भी पड़ सकती है। वहीं अगर उपयुक्त ढक्कन के साथ सही आंच पर पकाया जाए तो गर्मी का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है
सब्जी बनाते समय भी यह तरीका काम आता है। खासकर ऐसी सब्जियां जिनमें खुद पानी निकलता है उन्हें जरूरत से ज्यादा तेज आंच पर और खुले बर्तन में पकाने की जरूरत नहीं होती। ढक्कन लगाकर मध्यम या धीमी आंच पर पकाने से खाना अपनी भाप में भी पकता रहता है
हालांकि यहां एक जरूरी सावधानी है। प्रेशर कुकर के ढक्कन और सामान्य बर्तन के ढक्कन को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। प्रेशर कुकर को हमेशा उसके निर्माता के निर्देश के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए और उसके vent, gasket तथा safety valve में गड़बड़ी हो तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
यानी ढक्कन लगाने का मतलब बस बर्तन को किसी भी तरह बंद कर देना नहीं है। खाना और बर्तन के हिसाब से सही ढक्कन इस्तेमाल करना है
बर्तन और बर्नर का साइज एक जैसा रखें
किचन में गैस की बर्बादी का एक कारण गलत बर्नर और गलत आकार का बर्तन भी हो सकता है। कई बार लोग जल्दी खाना पकाने के लिए छोटे बर्तन को बड़े बर्नर पर रख देते हैं और आंच पूरी तेज कर देते हैं
ऐसी स्थिति में लौ बर्तन के नीचे के हिस्से से बाहर निकल सकती है। जो गर्मी बर्तन तक पहुंचनी चाहिए उसका कुछ हिस्सा आसपास की हवा में चला जाता है। इससे जरूरी नहीं कि खाना ज्यादा तेजी से पक जाए लेकिन गैस की ऊर्जा का इस्तेमाल कम प्रभावी तरीके से हो सकता है
अगर आप छोटे कप या छोटे पैन में थोड़ा दूध गर्म कर रहे हैं तो जरूरत से ज्यादा बड़ा बर्नर इस्तेमाल करने का कोई खास फायदा नहीं है। इसी तरह बड़े बर्तन में ज्यादा मात्रा में खाना पकाते समय बहुत छोटा बर्नर इस्तेमाल करने से खाना गर्म होने में जरूरत से ज्यादा समय लग सकता है
इसलिए बर्तन के तले के आकार के हिसाब से बर्नर चुनना बेहतर रहता है
यहां सिर्फ बर्नर का आकार ही नहीं बल्कि बर्तन का तला भी मायने रखता है। अगर बर्तन का तला टेढ़ा है या ठीक से गर्मी नहीं ले रहा है तो गैस का इस्तेमाल उतना अच्छा नहीं होगा जितना एक सही और सपाट तले वाले बर्तन में हो सकता है
खाना पकाते समय कोशिश करें कि लौ बर्तन के नीचे तक सीमित रहे और किनारों से बहुत ज्यादा बाहर न निकले
अगर आपको बार-बार ऐसा लगता है कि गैस की लौ बर्तन के चारों तरफ फैल रही है तो सिर्फ आंच कम करने के बजाय यह भी देखिए कि कहीं बर्तन के मुकाबले बर्नर बहुत बड़ा तो नहीं है
खाना उबलने के बाद आंच कम करें
बहुत से लोगों की आदत होती है कि खाना गैस पर रखने के बाद शुरुआत से अंत तक आंच तेज ही रखते हैं। उन्हें लगता है कि तेज आग का मतलब खाना जल्दी पकना है
लेकिन हर खाना पूरे समय तेज आंच पर पकाने से जरूरी नहीं कि जल्दी तैयार हो जाए
जब पानी या किसी तरल चीज का उबलने का तापमान आ जाता है तो उसके बाद लगातार बहुत तेज आंच देने से मुख्य रूप से ज्यादा भाप बनने लग सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि खाना उसी अनुपात में जल्दी पकता रहेगा
इसलिए जब खाना अच्छी तरह उबलने लगे तो कई मामलों में आंच को मध्यम या धीमी कर देना बेहतर रहता है
उदाहरण के लिए दाल अगर एक बार अच्छे से उबल गई है तो उसके बाद जरूरत के हिसाब से मध्यम या धीमी आंच पर पकाई जा सकती है। सब्जी में भी यही बात लागू होती है
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि हर recipe और हर बर्तन के लिए एक ही flame setting सही नहीं होती। कुछ चीजों को तेज आंच की जरूरत हो सकती है और कुछ को धीमी आंच की
इसलिए लक्ष्य यह होना चाहिए कि जितनी गर्मी की जरूरत है उतनी ही दी जाए
बहुत तेज आंच हमेशा ज्यादा अच्छा परिणाम नहीं देती
प्रेशर कुकर का सही इस्तेमाल करें
अगर घर में दाल, चना, राजमा, आलू या दूसरी ऐसी चीजें बनती हैं जिन्हें पकने में ज्यादा समय लगता है तो प्रेशर कुकर काफी उपयोगी हो सकता है
प्रेशर कुकर में बढ़े हुए दबाव और तापमान की वजह से कई खाद्य पदार्थ सामान्य खुले बर्तन की तुलना में जल्दी पक सकते हैं। इससे cooking time कम हो सकता है और उसी के साथ LPG की खपत भी कम हो सकती है
खासकर दाल और चने जैसी चीजों में इसका फायदा साफ दिखाई देता है
लेकिन प्रेशर कुकर को सिर्फ इसलिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए कि ज्यादा सीटी आएंगी तो खाना जल्दी बनेगा। सही मात्रा में पानी डालना, कुकर को जरूरत से ज्यादा न भरना और सही heat setting रखना भी जरूरी है
अगर कुकर में जरूरत से ज्यादा पानी डाल दिया जाए तो उसे गर्म करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। दूसरी तरफ बहुत कम पानी डालना भी सही नहीं है
कुकर के gasket, pressure release system और safety valve की स्थिति भी समय-समय पर देखनी चाहिए
अगर कुकर की सीटी लगातार असामान्य तरीके से आ रही है या steam leak हो रही है तो सिर्फ गैस बचाने के लिए उसे इस्तेमाल करते रहना सही नहीं है
सुरक्षा पहले आती है और उसके बाद LPG की बचत
फ्रिज से निकली चीजों को जरूरत के हिसाब से थोड़ा सामान्य होने दें
फ्रिज से निकली चीज का तापमान कमरे के तापमान से कम होता है। इसलिए अगर कोई चीज सीधे गैस पर जाती है तो उसे पहले गर्म होने में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है
अगर दूध या किसी तैयार खाने को फ्रिज से निकालकर तुरंत गर्म करना है तो उसे अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रखने की जरूरत नहीं है। खासकर दूध, दही, मांस या जल्दी खराब होने वाली चीजों के मामले में food safety का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है
इसलिए यहां एक जरूरी सुधार समझना चाहिए। “हर refrigerated food को 15–20 मिनट बाहर रखो और गैस आधी बचाओ” जैसा कोई universal rule नहीं है
कुछ चीजों को कमरे के तापमान पर लाने से heating time कम हो सकता है लेकिन हर food item को लंबे समय तक बाहर रखना सुरक्षित नहीं होता
इसलिए LPG बचाने के लिए food safety को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
अगर आपको किसी चीज को फ्रिज से निकालकर तुरंत पकाना है तो बर्तन और heat setting सही रखें। जरूरत से ज्यादा तेज आंच देकर जल्दी गर्म करने के बजाय नियंत्रित आंच का इस्तेमाल करें
खाना जितना चाहिए उतना ही गर्म करें और बार-बार गरम करने से बचें
दाल, चावल, चना और राजमा को पहले भिगोकर रखें
दाल और अनाज को पकाने से पहले भिगोना एक पुरानी और काफी practical kitchen habit है
चना और राजमा जैसे कठोर दानों को अगर पहले से पानी में भिगो दिया जाए तो वे पानी सोखकर नरम हो जाते हैं। इससे उन्हें पकाने में कम समय लग सकता है
दाल और चावल में भी भिगोने से cooking time कुछ मामलों में कम हो सकता है
लेकिन “भिगोने के बाद हर दाल सिर्फ एक या दो सीटी में ही पक जाएगी” ऐसा हर बार नहीं होगा। दाल की किस्म, उसकी उम्र, पानी की quality, भिगोने का समय और cooker की heat जैसी कई चीजें असर डालती हैं
फिर भी अगर आप रोजाना ऐसी चीजें बनाते हैं जिन्हें लंबे समय तक पकाना पड़ता है तो soaking को अपनी routine में शामिल करना उपयोगी हो सकता है
उदाहरण के लिए राजमा और छोले को पहले से भिगोकर रखने से उन्हें पकाना आसान हो सकता है। साथ ही उनका texture भी बेहतर हो सकता है
यहां भी साफ पानी का इस्तेमाल करें और भिगोई हुई चीजों को मौसम और food safety के हिसाब से संभालकर रखें
गीले बर्तन को पहले सुखाएं
बर्तन धोने के बाद अगर उसके नीचे काफी पानी लगा हुआ है और आप उसे सीधे गैस पर रख देते हैं तो गैस की गर्मी का कुछ हिस्सा उस पानी को सुखाने में चला जाता है
यह कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं है लेकिन अगर हर बार यही आदत हो तो पूरे महीने में अनावश्यक heating का थोड़ा हिस्सा जुड़ सकता है
इसलिए गैस जलाने से पहले बर्तन के नीचे का अतिरिक्त पानी साफ कपड़े से पोंछ देना आसान तरीका है
यह खासकर तब उपयोगी है जब आप तवे, कड़ाही या किसी ऐसे बर्तन को तुरंत गर्म करने वाले हों
लेकिन यहां भी बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर बर्तन थोड़ा नम है तो उससे कोई बहुत बड़ी गैस बर्बादी नहीं होने वाली
मुख्य बात यह है कि पानी से पूरी तरह भरे हुए या बहुत ज्यादा गीले बर्तन को गैस पर रखने की आदत न बनाएं
छोटी बचतों का फायदा तभी होता है जब वे रोज की आदत बन जाएं
गैस बर्नर को साफ रखें और लौ का रंग देखें
गैस बचाने के साथ-साथ safety के लिए भी बर्नर की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है
अगर बर्नर के छेद गंदगी या भोजन के अवशेष से बंद हो जाएं तो गैस और हवा का सही मिश्रण प्रभावित हो सकता है। इससे लौ का pattern बदल सकता है
आमतौर पर LPG stove की अच्छी तरह जलती लौ नीली दिखाई देती है। अगर लौ लगातार पीली या असामान्य दिखाई दे रही है तो burner की सफाई या appliance की जांच की जरूरत हो सकती है
यह जरूरी नहीं कि हर बार पीली लौ का मतलब सिर्फ burner गंदा होना ही हो। Gas pressure, air supply या appliance की दूसरी समस्या भी हो सकती है
इसलिए बर्नर को सिर्फ ऊपर से कपड़े से पोंछ देना पर्याप्त नहीं है अगर उसके छोटे holes में गंदगी जमा है
सफाई करते समय stove बंद रखें और बर्नर ठंडा होने दें
अगर सफाई के बाद भी लौ असामान्य रहती है तो qualified technician से appliance की जांच करवाना बेहतर है
गैस बचाने के चक्कर में खुद से गैस पाइप, regulator या stove की अंदरूनी fitting खोलना सही नहीं है
यहां LPG saving से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी safety है
गैस जलाने से पहले पूरी तैयारी कर लें
यह शायद सबसे आसान और practical आदतों में से एक है
गैस जलाने के बाद सब्जी काटना, मसाले ढूंढना, नमक निकालना या पानी भरना शुरू कर दिया तो burner जरूरत से ज्यादा समय तक जलता रहेगा
जरा सोचिए कि आपने कड़ाही गैस पर रख दी और तेल गर्म होने लगा लेकिन प्याज अभी तक कटा नहीं है
तेल गर्म हो रहा है और गैस चल रही है
फिर आप प्याज काटते हैं
फिर टमाटर ढूंढते हैं
फिर मसाले निकालते हैं
इस पूरे समय गैस चलती रहती है
अगर यही तैयारी गैस जलाने से पहले कर ली जाए तो cooking ज्यादा smooth हो सकती है
इस आदत को अपनाने का आसान तरीका है कि खाना बनाने से पहले सभी ingredients एक जगह रख लें
सब्जी काट लें
मसाले निकाल लें
पानी तैयार रखें
जरूरत के बर्तन पास रखें
अगर आटा या दूसरी तैयारी पहले से करनी है तो वह भी पहले कर लें
फिर गैस जलाएं
इससे खाना बनाते समय बार-बार गैस बंद और चालू करने की जरूरत कम हो सकती है और burner बेवजह चलता नहीं रहेगा
यह सिर्फ LPG बचाने का तरीका नहीं है बल्कि खाना बनाने का काम भी आसान बना देता है
सही बर्तन चुनें और तले की हालत देखें
किस बर्तन में खाना पकाया जा रहा है इसका असर भी cooking efficiency पर पड़ता है
एल्यूमिनियम जल्दी गर्म होता है और copper-bottom या multi-layer cookware गर्मी को अच्छी तरह distribute कर सकते हैं। Stainless steel भी बहुत आम और practical विकल्प है लेकिन उसकी heat conductivity अकेले copper जितनी नहीं होती
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर stainless steel बर्तन copper या aluminium से हमेशा जल्दी गर्म होगा
असल फर्क बर्तन के design, thickness, base और heat distribution पर भी निर्भर करता है
अगर बर्तन का तला सपाट है और burner के ऊपर सही तरह बैठता है तो गर्मी का इस्तेमाल बेहतर तरीके से हो सकता है
बहुत भारी बर्तन को सिर्फ इसलिए इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है कि वह मजबूत है। अगर उसमें खाना पकने में जरूरत से ज्यादा समय लग रहा है तो दूसरे उपयुक्त cookware से तुलना की जा सकती है
लेकिन मिट्टी के बर्तन या cast iron जैसे भारी cookware को पूरी तरह बेकार मानना भी सही नहीं है। कई खाना पकाने के तरीकों में इनका अपना फायदा होता है
LPG बचत के लिए मुख्य बात यह है कि cookware आपके खाना पकाने के तरीके के हिसाब से सही हो और उसे गर्म करने में अनावश्यक समय न लगे
LPG बचाने के लिए एक साथ इन सभी आदतों को कैसे अपनाएं
अब सवाल आता है कि इन दसों तरीकों को रोज की kitchen routine में कैसे शामिल किया जाए
आपको एक ही दिन में अपनी पूरी cooking बदलने की जरूरत नहीं है
पहले गैस जलाने से पहले तैयारी करने की आदत डालिए
इसके बाद बर्तन और burner का size देखिए
खाना उबलने के बाद flame कम करने की आदत डालिए
दाल, चना और राजमा जैसी चीजों के लिए soaking शुरू कीजिए
जहां सही हो वहां lid का इस्तेमाल कीजिए
और stove की flame को समय-समय पर देखिए
इन आदतों का फायदा धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है
किसी एक hack से अचानक सिलेंडर बहुत ज्यादा दिन चलने लगे ऐसा जरूरी नहीं है
लेकिन जब एक साथ कई छोटी गलतियां कम होती हैं तो कुल cooking efficiency बेहतर हो सकती है
एक महीने में LPG बचत को खुद कैसे मापें
अगर आप सच में जानना चाहते हैं कि आपकी kitchen habits बदलने से कितना फायदा हुआ है तो अंदाजे के बजाय अपनी LPG usage को track करना ज्यादा अच्छा तरीका है
मान लीजिए आपका एक cylinder आज खत्म हुआ
उस तारीख को लिख लें
अब अगले cylinder के इस्तेमाल के दौरान cooking habits बदलें
उदाहरण के लिए gas जलाने से पहले preparation करें
pressure cooker का इस्तेमाल करें
burner के हिसाब से utensil चुनें
और unnecessary high flame से बचें
अगली बार cylinder खत्म होने की तारीख लिखें
फिर दोनों periods की तुलना करें
इससे आपको अपने घर की वास्तविक LPG consumption का अंदाजा मिलेगा
यह तरीका “आपकी गैस 15 दिन ज्यादा चलेगी” जैसी generic बात से ज्यादा उपयोगी है क्योंकि हर घर की जरूरत अलग होती है
अगर आपके घर में रोज बहुत ज्यादा cooking होती है तो छोटी efficiency improvement भी noticeable हो सकती है
अगर cooking कम होती है तो फर्क छोटा हो सकता है
LPG बचत के साथ इन गलतियों से भी बचें
गैस बचाने के लिए कुछ लोग ऐसी गलतियां भी करने लगते हैं जो उल्टा नुकसान कर सकती हैं
उदाहरण के लिए बहुत धीमी आंच करके खाना पकाते रहना और जरूरत से ज्यादा समय तक burner चलाना भी सही नहीं है
इसी तरह pressure cooker को जरूरत से ज्यादा भरना सही नहीं है
गैस की लौ बुझ जाए और आप उसे दोबारा जलाने के बजाय gas knob खुला छोड़ दें तो यह बेहद खतरनाक स्थिति हो सकती है
Gas smell आए तो इसे LPG बचत का मामला समझकर ignore नहीं करना चाहिए
ऐसी स्थिति में gas supply बंद करें, आग या electrical spark से बचें और उचित emergency procedure अपनाएं
Stove या regulator को खुद खोलकर repair करने की कोशिश न करें
यानी LPG बचाने की हर कोशिश safety के बाद ही होनी चाहिए
LPG बचाने के 10 Hacks एक नजर में
| Smart Kitchen Hack | क्या करें | संभावित फायदा |
|---|---|---|
| ढक्कन लगाकर पकाएं | सही बर्तन पर lid इस्तेमाल करें | गर्मी और भाप की बर्बादी कम हो सकती है |
| सही burner चुनें | बर्तन के size के अनुसार burner लें | heat का बेहतर इस्तेमाल |
| उबलने के बाद flame कम करें | जरूरत के अनुसार medium/low flame रखें | अनावश्यक तेज heating से बचाव |
| Pressure cooker | दाल और hard foods में इस्तेमाल करें | cooking time कम हो सकता है |
| Refrigerated food | जरूरत के हिसाब से handling करें | heating time कम हो सकता है |
| Soaking | चना, राजमा, दाल आदि भिगोएं | cooking time कम हो सकता है |
| बर्तन सुखाएं | नीचे का पानी पोंछें | शुरुआती heat loss कम |
| Burner साफ रखें | flame और burner की स्थिति देखें | बेहतर combustion और safety |
| Pre-preparation | गैस जलाने से पहले ingredients तैयार करें | बेकार burner time कम |
| सही cookware | सपाट और सही base वाला बर्तन लें | heat transfer बेहतर हो सकता है |
क्या इन तरीकों से एक LPG cylinder 15 से 20 दिन ज्यादा चल सकता है
यह सवाल बहुत लोगों के मन में आएगा
सीधी बात यह है कि इसकी कोई fixed guarantee नहीं दी जा सकती
अगर किसी घर में पहले से LPG का इस्तेमाल बहुत inefficient तरीके से हो रहा है तो cooking habits बदलने के बाद noticeable difference आ सकता है
लेकिन अगर कोई परिवार पहले से ही सही बर्नर, सही flame, pressure cooker और preparation जैसी आदतें अपनाता है तो सिर्फ इन hacks को दोबारा अपनाने से cylinder की अवधि 15 या 20 दिन बढ़ना जरूरी नहीं है
LPG consumption कई चीजों पर निर्भर करती है
घर में कितने लोग हैं
दिन में कितनी बार खाना बनता है
कितनी मात्रा में खाना बनता है
कितने बर्नर चलते हैं
किस तरह के बर्तन इस्तेमाल होते हैं
कितनी देर खाना पकता है
और LPG stove की condition कैसी है
इसलिए किसी भी article में “हर घर में 15–20 दिन की बचत पक्की” कहना सही नहीं होगा
बेहतर बात यह है कि सही cooking habits से unnecessary LPG consumption कम की जा सकती है और कुछ घरों में इसका असर cylinder की overall duration पर दिखाई दे सकता है
क्या तेज आंच पर खाना जल्दी बनता है
कुछ स्थितियों में तेज आंच खाना जल्दी गर्म कर सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे cooking process के दौरान maximum flame सबसे अच्छा तरीका है
अगर flame इतनी तेज है कि बर्तन के किनारों से बाहर निकल रही है तो उसका पूरा फायदा खाना पकाने को नहीं मिल रहा है
वहीं खाना उबलने के बाद लगातार maximum flame रखना भी कई मामलों में जरूरी नहीं होता
इसलिए शुरुआत में जरूरत के अनुसार ज्यादा heat और उसके बाद उचित flame रखना ज्यादा practical तरीका है
यही कारण है कि kitchen में flame control एक महत्वपूर्ण आदत है
LPG बचत के लिए सबसे पहले कौन सी आदत शुरू करें
अगर आप आज से ही LPG बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक बहुत आसान काम शुरू कीजिए
गैस जलाने से पहले पूरी तैयारी
इसके बाद दूसरा काम कीजिए
बर्तन के size के अनुसार burner चुनिए
तीसरा
खाना उबलने के बाद flame को जरूरत के अनुसार कम कीजिए
चौथा
जहां सही हो वहां lid इस्तेमाल कीजिए
और पांचवां
दाल और hard grains को पहले से soak कीजिए
इन पांच आदतों को रोज अपनाना आसान है और इसके लिए आपको नया कोई महंगा सामान खरीदने की जरूरत भी नहीं है
निष्कर्ष
LPG की बचत किसी एक बड़े जुगाड़ से नहीं बल्कि रोज की छोटी-छोटी cooking habits से होती है
अगर गैस जलाने से पहले पूरी तैयारी कर ली जाए तो burner बेवजह लंबे समय तक नहीं चलता
अगर बर्तन के हिसाब से burner चुना जाए तो गर्मी का इस्तेमाल बेहतर हो सकता है
अगर खाना उबलने के बाद flame को जरूरत के अनुसार कम किया जाए तो अनावश्यक तेज heating से बचा जा सकता है
अगर दाल, चना और राजमा जैसी चीजों को पहले से भिगोया जाए तो cooking time कम हो सकता है
अगर pressure cooker का सही इस्तेमाल किया जाए तो लंबे समय तक पकने वाले foods जल्दी तैयार हो सकते हैं
अगर burner साफ और ठीक स्थिति में रखा जाए तो cooking efficiency के साथ safety भी बेहतर रहती है
और अगर सही cookware का इस्तेमाल किया जाए तो गर्मी को खाने तक पहुंचाने का काम ज्यादा अच्छा हो सकता है
इन सभी तरीकों को मिलाकर अपनाने से आपके घर में LPG की unnecessary consumption कम हो सकती है
लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि हर घर की LPG खपत अलग होती है
इसलिए किसी एक व्यक्ति के घर में जो बचत होती है वह दूसरे घर में बिल्कुल उसी तरह नहीं होगी
आपके लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपनी LPG consumption को कुछ महीनों तक note करें और फिर cooking habits बदलने के बाद तुलना करें
इससे आपको पता चलेगा कि आपके अपने kitchen में कौन सा तरीका सबसे ज्यादा काम कर रहा है
LPG बचाने का मतलब खाना कम पकाना नहीं है
इसका मतलब है जितनी गर्मी की जरूरत है उतनी ही गर्मी का सही इस्तेमाल करना और बेकार में गैस जलने से बचाना
अगर यह छोटी सी बात रोज की आदत बन जाए तो महीने के आखिर में इसका फायदा आपके kitchen budget में दिखाई दे सकता है
मेरी राय
मेरी नजर में LPG बचाने का सबसे अच्छा तरीका कोई एक secret kitchen hack नहीं है
असल बचत तब शुरू होती है जब खाना बनाने का पूरा तरीका थोड़ा व्यवस्थित हो जाता है
गैस जलाने से पहले सब्जी तैयार है
मसाले तैयार हैं
पानी तैयार है
बर्तन सही है
बर्नर सही है
और यह भी पता है कि खाना किस flame पर पकाना है
इस तरह गैस सिर्फ उतनी देर चलती है जितनी जरूरत है
दूसरी तरफ अगर गैस जलाकर तैयारी शुरू की जाए तो हमें पता ही नहीं चलता कि कितने मिनट burner सिर्फ इंतजार में चलता रहा
इसी तरह बहुत तेज flame को भी लोग अक्सर खाना जल्दी पकाने का तरीका समझ लेते हैं
लेकिन अच्छी cooking का मतलब सिर्फ ज्यादा आग देना नहीं है
अच्छी cooking का मतलब है heat को सही जगह और सही समय पर इस्तेमाल करना
अगर आप दाल बना रहे हैं तो pressure cooker का इस्तेमाल कर सकते हैं
अगर सब्जी बना रहे हैं तो जरूरत के अनुसार lid लगा सकते हैं
अगर पानी उबल चुका है तो flame कम कर सकते हैं
अगर चना या राजमा बनाना है तो पहले से soaking कर सकते हैं
अगर कई चीजें बनानी हैं तो पहले पूरी तैयारी कर सकते हैं
और अगर flame का रंग सामान्य नहीं दिख रहा है तो stove की condition जांच सकते हैं
यानी LPG saving को किसी एक trick के बजाय पूरी kitchen habit की तरह देखना ज्यादा सही है
और सबसे जरूरी बात safety है
सिर्फ गैस बचाने के लिए खाना अधपका नहीं छोड़ना है
बहुत कम पानी में pressure cooker नहीं चलाना है
gas leakage को ignore नहीं करना है
खराब burner को खुद से खोलकर repair नहीं करना है
और LPG appliance के साथ कोई ऐसा प्रयोग नहीं करना है जिससे घर में खतरा पैदा हो
अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हुए खाना पकाते हैं तो LPG की बचत के साथ cooking भी ज्यादा व्यवस्थित हो सकती है
और यही असली मकसद होना चाहिए
कम गैस में ज्यादा काम निकालना नहीं बल्कि बेकार की गैस को खर्च होने से रोकना
यही छोटी आदतें लंबे समय में आपके महीने के kitchen budget पर अच्छा असर डाल सकती हैं
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